Tuesday, April 14, 2020

सिर्फ फौज़ी ही नहीं बल्कि हर हिंदुस्तानी घर से बाहर है

पहले दील्ली में , अब बांद्रा ( मुम्बई ) में ,
 अगर details में आप surf किजीयेगा तो पता चलेगा कि अहमदाबाद , सुरत, हैदराबाद जैसे जगहो पर भी same scene create हुआ । 
इनलोगो ( people on the road ) को बस इतना पता था कि 15 अप्रिल को lockdown खुलेगा ओर इन्हे घर जाने का मौका मिलेगा.... ।
क्योकि जिनलोगो का खाने का और हगने का ठीकाना नही है न उनके के पास मोदी जी को live देखने के लिये Smart Phone or T.V. कहाँ से आयेगा ?
दो वक़्त की रोटी के लिये ये लोग गंदगी मे सोते,उठते और फिर ये कहले कि गन्दगी में रहते हुए ही अपना जीवन काट लेते हैं..|
major labour class crowd कि बात अगर हम करें तो वे बिहार के रहने वाले थे जिन्हे किसी भी तरह अपने घर (village) जाना था..|
महाराष्ट्र सरकार  तो वैसे भी बिहारियों पर कई बार डंडे चलवा चुकी है लेकिन करंट situation में central government को इसपर pre-planned होना चाहिए था |
कई लोग इस चीज को political agenda भी बता रहे हैं लेकिन अगर ऐसा हुआ भी तो इसमें उस भीड़ की क्या गलती थी जिसपर पुलिस के डंडे बरसाये गये ?
वैसे बिहार सरकार के दावे को अगर सुनी जाये तो उन्होंने सभी लोगों के खाने, रहने का   इंतज़ाम करवा रखा है लेकिन अगर ग्राउंड लेवल पर ऐसा होता तो ये scene create ही नहीं होता|
सरकार कितने भी दावे कर ले पर ऐसी घटना उनकी नाकामयाबी को ही दर्शाती है अगर ग्राउंड लेवल पर देखा जाय तो सरकार ना पहले कुछ ध्यान देती थी ना उनसे आगे की उम्मीद है | पर करंट situtation को संभालने के लिए सरकार को ग्राउंड लेवल पर जाकर देखना ही होगा ।

वैसे ये सब लिखकर भी कुछ नही होने वाला है क्योंकि हम सब जानते हैं :-

गरीबी का श्राप सबसे खतरनाक घातक और जानलेवा श्राप है।
इस की वजह से वो गंदगी में सोने को मजबूर हैं, खराब खाने को मजबूर हैं, न हगने का न नहाने का कोई ठिकाना, ऊपर से लॉक डाउन खत्म होगा सोचकर घर के लिए निकले तो पुलिस से लाठी खाने को मजबूर।
जिनके पास पैखाना करने के लिए व्यवस्था नहीं उसको कहाँ मोबाइल होगा जिसमें वो मोदी का भाषण सुनकर फ़ैसला कर सकेगा कि घर में रहना है कि निकलना है।
इस देश की जनसंख्या और बेरोज़गारी की कोख़ से जन्मी ग़रीबी कोरोना से बड़ा वायरस है |

Tuesday, March 17, 2020

मिथिलाञ्चल के किछ खाश व्यञ्जन

मिथिलाञ्चल के किछ प्रमुख व्यञ्जन जे दिनो दिन भुतलैल जा रहल ऐछ मुदा शहर के गहमा गहमी मे एहन फ़सलौन कि शाही पनीर आ चिल्ली पनीर सब के चक्क्र्र मे अपन व्यञ्जन के बिसरैत चैल गेलौ। बिरीया,मुरौरी,अदौरी,तिसीयौरि सब बनबै के प्र्चलन अपन मिथिलाञ्चल मे बहुत पहिले स ऐछ।

कहल जै छै पुरान जमाना मे बरहो मास तरकारी नै भेटै छल ता लोग ऐ  दुआरे बनेनाइ शुरू केलक की बारहो  मास तरकारी के स्वाद ल सकीय आ दोसर कारन इहो छेलै की अगर किछ आपातकाल के इस्थिति भ गेलै , जेना की बाइढ़ आइब गेल या किछ औरो कियेक कि पाहिले जमाना में ओते जाइ अबै के सुविधा सब सेहो नै छल  | बाद में  जेना जेना सुविधा बढ़लै लोग सब सब  जगह जाइ आबअ लागल  ,शुरू में ता एकरा स्वाद के लेल बनौलक बाद में सब धीरे धीरे बाहर के सामान पर निर्भर भ गेल आ आब जाकअ जेना विलुप्ते क देलकइ |


नोट:-  मिथिलांचल में बेरोजगारी के इहो सबसअ पैघ काऱण आईछ  कि हम बाहर के चीज़ तअ अपना लइ छी मगर अपन चीज़ के बाहर तक नई पहुँचा पबई छी