मिथिलाञ्चल के किछ प्रमुख व्यञ्जन जे दिनो दिन भुतलैल जा रहल ऐछ मुदा शहर के गहमा गहमी मे एहन फ़सलौन कि शाही पनीर आ चिल्ली पनीर सब के चक्क्र्र मे अपन व्यञ्जन के बिसरैत चैल गेलौ। बिरीया,मुरौरी,अदौरी,तिसीयौरि सब बनबै के प्र्चलन अपन मिथिलाञ्चल मे बहुत पहिले स ऐछ।
कहल जै छै पुरान जमाना मे बरहो मास तरकारी नै भेटै छल ता लोग ऐ दुआरे बनेनाइ शुरू केलक की बारहो मास तरकारी के स्वाद ल सकीय आ दोसर कारन इहो छेलै की अगर किछ आपातकाल के इस्थिति भ गेलै , जेना की बाइढ़ आइब गेल या किछ औरो कियेक कि पाहिले जमाना में ओते जाइ अबै के सुविधा सब सेहो नै छल | बाद में जेना जेना सुविधा बढ़लै लोग सब सब जगह जाइ आबअ लागल ,शुरू में ता एकरा स्वाद के लेल बनौलक बाद में सब धीरे धीरे बाहर के सामान पर निर्भर भ गेल आ आब जाकअ जेना विलुप्ते क देलकइ |
नोट:- मिथिलांचल में बेरोजगारी के इहो सबसअ पैघ काऱण आईछ कि हम बाहर के चीज़ तअ अपना लइ छी मगर अपन चीज़ के बाहर तक नई पहुँचा पबई छी
कहल जै छै पुरान जमाना मे बरहो मास तरकारी नै भेटै छल ता लोग ऐ दुआरे बनेनाइ शुरू केलक की बारहो मास तरकारी के स्वाद ल सकीय आ दोसर कारन इहो छेलै की अगर किछ आपातकाल के इस्थिति भ गेलै , जेना की बाइढ़ आइब गेल या किछ औरो कियेक कि पाहिले जमाना में ओते जाइ अबै के सुविधा सब सेहो नै छल | बाद में जेना जेना सुविधा बढ़लै लोग सब सब जगह जाइ आबअ लागल ,शुरू में ता एकरा स्वाद के लेल बनौलक बाद में सब धीरे धीरे बाहर के सामान पर निर्भर भ गेल आ आब जाकअ जेना विलुप्ते क देलकइ |
नोट:- मिथिलांचल में बेरोजगारी के इहो सबसअ पैघ काऱण आईछ कि हम बाहर के चीज़ तअ अपना लइ छी मगर अपन चीज़ के बाहर तक नई पहुँचा पबई छी
